Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 7, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
मुहूर्तमिव विश्रम्य तस्य पार्श्वे शचीपतेः ।
स्वर्गं विहर्तुमुत्तस्थौ स्वर्गाभिपरिमोदितः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्र के समीप में एक मुहूर्त भर विश्राम कर श्री शुक्राचार्य स्वर्ग मे चलनेवाले देवताओं से
उत्साहित होकर स्वर्ग मेँ विहार करने के लिए उठ खड़े हुए