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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

किं किलासति रामेह मोहजाले समुज्झति । यत्किंचित्सङ्गसङ्गत्या विमोहे कारणं हि तत् ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

ज्ञान की सार्थकता का विचार करने पर भी मोह आदि की सत्ता या असत्ता नहीं कही जा सकती, अतएव इसकी अनिर्वचनीयता ही सिद्ध हुई, ऐसा कहते हैं। मोहजाल यदि अत्यन्त असत्‌ है, तो भला बतलाइए, पुरुष ज्ञान द्वारा किसका निरास करेगा ? क्योकि निरास करने योग्य वस्तु के अभाव में निरासक ज्ञान की सार्थकता नहीं हो सकती । यदि मोहजाल अत्यन्त सत्‌ है, तो ज्ञान से किसका त्याग करेगा ? कारण कि ज्ञान सत्य वस्तु का निवर्तक नहीं देखा जाता, इसलिए अनिर्वचनीय अध्यासरूप संगति से रज्जुसर्प आदि के समान यह दृश्य समुदाय मोह में कारण है, ऐसा परिशेष से सिद्ध होता हे