Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 61, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अहंकारस्य देहस्य संसारस्याप्लवस्य च ।
स्वविचारमलंकृत्य सत्यमेवावलोकयेत् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
आभ्यन्तर अहंकार के उससे
बाहरी शरीर के, उससे भी बाहरी पुत्र, मित्र आदि संसार के, जो तीन सागर तुल्य हैं, नौकारूप आत्मविचार
को पूर्ण करके सत्य का ही अवलोकन करना चाहिये