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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

सकलसुरगणाभिवन्दितोऽसौ भृगुतनयः शतमन्युपार्श्वसंस्थः । चिरतरमतुलामवाप तुष्टिं नरपतिसत्तमलालनं बभूव ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

सब देववृन्दों से अभिवन्दित एवं देवराज इन्द्र के समीप में बैठे हुए श्री शुक्राचार्य को चिरकालतक युक्त सन्तोष प्राप्त हुआ और वे नृपतियों में सर्वश्रेष्ठ देवराज इन्द्र के पुत्र आदि के तुल्य लालनीय हुए