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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

मोह एवंमयो मिथ्या जागतः स्थिरतां गतः । संकल्पनेन मनसा कल्पितोऽचिरतः स्वयम् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार का जगत सम्बन्धी मिथ्या मोह स्थिरता को प्राप्त हुआ है । संकल्प करनेवाले स्वयं मनने ही शीघ्र उसकी कल्पना की है