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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

स ततस्तेजसस्तस्मादभ्युदेति दिवाकरः । जालमण्डलमध्यस्थो ज्वलत्कनककुण्डलः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर वह देव उस पिण्डीभूत तेज से आदित्य बनकर आज भी प्रत्यक्ष उदित होता है, वह प्रभा समूहरूप मण्डल के मध्य में स्थित और जलते हुए कनक कुण्डल से युक्त है