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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 58, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 58, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

सर्वत्रैव स्थितो ह्यात्मा सर्वमात्ममयं स्थितम् । सर्वमेवेदमात्मैवमात्मन्येव भवाम्यहम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

सभी जगह अधिष्ठानरूप से आत्मा स्थित है । विवर्तरूप कल्पित विकार के दर्शन से सब आत्ममय ही है । तत्त्वदर्शन से तो सब आत्मा ही हे । इस दृष्टि से मैं परमार्थ आत्मा में ही सर्वदा स्थित हूँ