Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
कदम्बगोलकैस्तुल्यं ब्रह्माण्डं स्फारचेतसः ।
किं प्रयच्छति किं भुंक्ते प्राप्तेऽस्मिन्सकलेपि सः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
अपरिच्छिन्न आत्मानन्द की दृष्टि में ब्रह्माण्ड कदम्ब गोलक के तुल्य है। इस सारे ब्रह्माण्ड के
प्राप्त होने पर भी वह ज्ञानी पुरुष को क्या देता है और क्या भोग करता हे !