Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, Verses 33–34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, verses 33–34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
इदं हेयमुपादेयमिदमित्यसदुत्थितौ ।
निश्चयौ गलितौ यस्य ज्ञस्यासावतिदुर्लभः ॥ ३३ ॥
करोतु भुवने राज्यं विशत्वम्भोदमम्बु वा ।
नात्मलाभादृते जन्तुर्विश्रान्तिमधिगच्छति ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह हेय है, यह उपादेय है, इस प्रकार अज्ञान से उत्पन्न हुए निश्चय जिस
ज्ञानी के नष्ट हो गये, ऐसा पुरुष अति दुर्लभ है