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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

अस्थिराश्चेज्जगद्भावास्तदप्यास्था न शोभते । पयःफेनास्थिरस्यान्ते दुःखमेषा ददाति ते ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

जगत के पदार्थ यदि अस्थिर हैं, तो भी उनमें आस्था करना शोभा नहीं देता, क्योकि अस्थिर पदार्थ में आस्था कर रहे आपको दूध के फेन के सदृश अस्थिर पदार्थ का नाश होने पर वह आस्था दुःख ही दे सकती है । भाव यह है कि दूध के फेन में आस्था करने से उसका नाश होने पर यदि शोक उचित होता तो देहादि में आस्था करने से उनका नाश हाने पर भी शोक उचित होता