Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अपर्यन्तस्य कालस्य कश्चिदंशः शरच्छतम् ।
तावन्मात्रमहाश्चर्यः किमर्थं सोऽनुधावति ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
असीम
काल का मनुष्य देह की परमावधिरूप सौ वर्ष कोई एक अंश है । पूर्व और उत्तर काल में कभी न रहने के
कारण अत्यन्त असंभावित, केवल उतने ही काल के लिए मनुष्य देहात्मतारूप आश्चर्य से युक्त वह
सम्पूर्ण इन्द्रियों से रहित आत्मा किसलिए उसका अनुसरण करता है ? उसका ऐसा करना सर्वथा
अनुचित है