Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
तत्राभिमतमासाद्य स्थानमेत्य नभस्तलम् ।
प्रविश्य खं मुनीनां च मध्यं स्वस्थ इव स्थितः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ अपने अभीष्ट स्थान को पाकर
ओर आकाशतल मेँ जाकर और आकाश में प्रविष्ट होकर मैं सप्तर्षियों के मध्य में स्वस्थ की तरह
स्थित हो गया