Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
असिद्धं सर्वमेवैतदसिद्धेनैव साधितम् ।
संकल्पेन जगद्यस्माद्भावना क्वावतिष्ठताम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि एक बार बाधित होकर भी यह जगत भावना से पुनःहोगा इस पर कहते हैं ।
यह सारा जगत असत् ही है, क्योकि असत् संकल्प से ही इसका निर्माण हुआ है, इसलिए भावना
कहाँ पर रहेगी ? भाव यह है कि बाधित पदार्थ में भावना का अवतरण ही नहीं हो सकता हे