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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

असौ सोऽहमिमे भावाः सुखदुःखमया मम । व्यर्थमेवेति नानास्था येनान्तः परितप्यसे ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

यह जो वेदान्तो में प्रसिद्ध पूर्णात्मा है, वह मैं ही हू, मेरे ये सुख-दुःखमय जन्मादि विकार मिथ्या ही है, इस प्रकार की आस्था अज्ञानवश नहीं होती, इसी से तुम्हें अन्तःकरण में संताप होता हे