Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
असदप्युत्थितारम्भमवस्तुमयमाततम् ।
संसारसंस्थानमिदमेवमाकथितं मया ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
परमार्थसत्ताशून्य अज्ञान से उत्पन्न अतएव मायामय विस्तृत इस संसार की इस
स्थिति का मैंने इस प्रकार परोक्षरूप से वर्णन किया है