Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
सूर्यांशुकचदालोलतरङ्गोत्तुङ्गमौक्तिकाः ।
वहन्ति सरितो यत्र सन्मुक्तावलयश्चलाः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जहाँ पर सूर्य की किरणों से चमकती हुई चंचल तरंग ही बड़ी-
बड़ी मुक्ता है, जहाँ पर ओस की सुन्दरमोतियों की मालारूप चंचल नदियाँ बहती है