Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
ततःप्रभृति तत्रासौ प्रसिद्धस्तापसाश्रमे ।
कदम्बदाशूर इति शूरस्तपसि दारुणे ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
इक्यावनवाँ सर्ग
मानसिक यज्ञों से दाशूर का आत्मबोध, वनदेवी में पुत्रोत्पत्ति और पुत्र के लिए ज्ञान प्रदान ।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, तपस्वी के उस आश्रम में घोर तपस्या में अभिमुख वे
दाशूर तब से लेकर कदम्बदाशूर नाम से प्रख्यात हुए