Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
रजसोद्भूलिताकारं द्वितीयमिव शंकरम् ।
छायया फलशालिन्या समस्तजनशंकरम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
पुष्पराग से उसका सारा आकार धूसरित था, अतएव वह धूलि धूसरित द्वितीय शंकर-सा
था। भगवान शंकर तो केवल भक्तों का ही कल्याण करते हँ, किन्तु वह फल से सुशोभित होनेवाली
छाया से सब लोगों का कल्याण करता था