Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 49, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
मध्यभागस्फुरत्तुङ्गैः स्तबकैर्घनपङ्क्तिभिः ।
सहस्राक्षत्वमतुलैर्जेतुमिन्द्रमिवोद्यतम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
मध्यभाग
में चमक रहे, भँवरों से युक्त, बड़ी-बड़ी निबिड पंक्तिवाले पुष्प गुच्छों से, जिनकी शोभा ओर संख्या
में इन्द्र नेत्रो से अधिक होने के कारण उनसे तुलना नहीं की जा सकती, सहत्त्राक्षता को प्राप्त करके
मानों इन्द्र को जीतने के लिए वह उद्यत था