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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, Verses 22–23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 48, verses 22–23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 22,23

संस्कृत श्लोक

मातापितृवियोगेन शोकसंतापिताशयः । म्लानिमभ्याययौ नूनं हेमन्त इव पङ्कजम् ॥ २२ ॥ बालोऽसावतिदीनात्मा वनदेवतया वने । इत्थमाश्वासितो राम तदाऽदृश्यशरीरया ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

माता और पिता के वियोग से शोक सन्तप्त वे हेमन्त मेँ कमल के समान अत्यन्त म्लान हो गये । हे [= “एक एव” इस शब्द से ज्ञात होता है कि उनकी माता ने पिता का अनुगमन कर लिया था । श्रीरामचन्द्रजी, अत्यन्त दीन उस बालक को वन देवता ने अदृश्य शरीर होकर इस प्रकार आश्वासन दिया