Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
तुल्यकालमनन्तेषु कालान्तरभवेषु च ।
जगत्सु प्रोद्भविष्यन्ति बहून्यन्यानि भूरिशः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार अन्यान्य कालों मेँ उत्पन्न हुए अनन्त जगतां में अन्य बहुत से सुर, असुर आदि के शरीर
प्रचुर मात्रा में एक ही समय उत्पन्न होगे