Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 57
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
कदाचिदनभिव्यक्तं कदाचिद्व्यक्तिमागतम् ।
इदमस्ति परे तत्त्वे सर्वं वृक्ष इवार्तवम् ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वृक्ष में
विभिन्न ऋतुओं में होनेवाले फल-फूल आदि कभी अनभिव्यक्त रहते हैं, कभी प्रकट हो जाते हैं वैसे
ही परमतत्त्व में यह सब जगत कभी अनभिव्यक्त रहता है, कभी प्रकट हो जाता है। सर्वात्मा रहता है,
कभी प्रकट हो जाता है