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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verse 47

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

निदर्शनार्थं सृष्टेस्तु मयैकस्य प्रजापतेः । भवते कथितोत्पत्तिर्न तत्र नियमः क्वचित् ॥ ४७ ॥

हिन्दी अर्थ

एक का यह वर्णन स्थालीपुलाक न्याय से अन्यान्य सृष्टियों के भी दृष्टान्त के लिए है, ऐसा कहते हैँ । एक प्रजापति की उत्पत्ति सृष्टि के दृष्टान्त के लिए मैंने आपसे कही, उसमें कहीं पर नियम नहीं है