Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, Verses 28–30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 47, verses 28–30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 28,29

संस्कृत श्लोक

चित्राकारविकाराश्च चित्ररूपा हि सृष्टयः । व्यतिरिक्ता न सर्वेषां समस्ताः सृष्टिदृष्टयः ॥ २८ ॥ तत्त्वज्ञविषये राम सलिलादिव वृष्टयः । आयान्ति सृष्टयो देवाज्जलदादिव वृष्टयः ॥ २९ ॥ व्यतिरिक्ता न सर्वेषां समस्ताः सृष्टिदृष्टयः । व्यतिरिक्ता द्रवाम्भोधिस्वाष्ठीलाः शाल्मलेरिव ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, सब ब्रह्माण्डं की विचित्र आकार-प्रकार के विकारों से युक्त विचित्र रूपवाली सृष्टिर्यौ एवं सभी सृष्टि द्रष्टियाँ तत्त्वज्ञ की दृष्टि में जल से वृष्टियों के समान अतिरिक्त नहीं हे, ओर अतत्त्वज्ञ की दृष्टि से तो मेघ से वृष्टि की तरह तटस्थ ईश्वर से उत्पन्न होती हे