Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
नष्टे धनेऽथ दारादौ हर्षस्यावसरो हि कः ।
पारावलोकिनस्त्वेतैर्विरागं यान्ति साधवः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
नश्वर स्वभाववाले
धन, स्त्री, पुत्र आदि के विषय में हर्ष का अवसर ही क्या है ? जो साधु पुरुष इसकी नश्वरता, नरक
हेतुता आदि से परिणाम में कटुता का अवलोकन करते हैं, वे उनसे वैराग्य को प्राप्त होते हैं