Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 46, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अहं जगच्चैकमिदं सर्वमेवेति यस्य धीः ।
आस्थानास्थे परित्यज्य संस्थिता स न मज्जति ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं और यह सम्पूर्ण जगत एक ही है, ऐसी जिनकी बुद्धि आस्था ओर अनास्था का त्याग करके स्थित है,
वह पुरुष निमग्न नहीं होता