Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
स्वसंकल्पकृताः सर्वे देवासुरनरादयः ।
स्वसंकल्पोपशमने शाम्यन्त्यस्नेहदीपवत् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए देवादिशक्तियों द्वारा भी मुक्ति का प्रतिरोध नहीं किया जा सकता, ऐसा कहते हैं।
देवता, असुर, मनुष्य आदि सब अपने अपने संकल्प से किये गये हैं। अपने संकल्प की निवृत्ति होने
पर तैलरहित दीप के समान वे शान्त हो जाते हैं