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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 45, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

सत्तासत्ते पदार्थानां सर्वेषां सर्वदैव हि । महाबाहो संभवतः सर्वशक्तौ विभौ सति ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

यदि सदा ही यह जगत असत्‌ है तथा ब्रह्म सदा ही सत्‌ है ओर उनका परस्पर स्पर्श नहीं है, तो जगत में सत्ता ओर असत्ता कादाचित्क (कभी होनेवाली) कैसे हो सकती हैं; इस पर कहते है । हे महाबाहो, सर्वशक्ति विभूके रहते सब पदार्थो की सत्ता ओर असत्ता सदा ही हो सकती है । भाव यह है कि सत्ता ओर असत्ता कादाचित्क (कभी होनेवाली) नहीं हैँ किन्तु सनातन है । उनकी परस्पर आविभवि द्वारा पारापारी से अवेश कल्पना ही अचिन्त्य मायाशक्ति द्वारा की जाती हे