Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 44, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
अनन्तानि विचित्राणि शास्त्राणि समकल्पयत् ।
दृष्टिरेवमियं राम सर्गेऽस्मिन्स्थितिमागता ।
विरिञ्चिरूपान्मनसः पुष्पलक्ष्मीर्मधोरिव ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे वसन्त से पुष्पशोभा
का आविर्भाव होता है, वैसे ही ब्रह्मारूपधारी मनसे इस सृष्टि में यह दृष्टि यों स्थिति को प्राप्त हुई
है