Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
येनैव व्यवहारेण ब्रह्माण्डेऽस्मिन्जनाः स्थिताः ।
तेनैवान्येषु तिष्ठन्ति सन्निवेशविलक्षणाः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस ब्रह्माण्ड में लोग जिस मनुष्य आदि के
उचित व्यवहार से स्थित है, उसी व्यवहार से अन्यान्य ब्रह्माण्डों में भी वे स्थित हैं केवल अन्य
द्वीपवासी लोगों के समान उनकी आकृति में विलक्षणता है