Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 43, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
केचिच्छ्रपचचाण्डालकिरातावेशपुष्कसाः ।
केचित्तृणौषधी केचित्फलमूलपतङ्गकाः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई म्लेच्छ, चाण्डाल और किरात की
योनि में उत्पन्न अधम जातियों मे स्थित हे, कोई तृण ओर औषधि के रूप में विद्यमान हैं और कोई
फल, मूल तथा पतंगों के रूप में स्थित हैं