Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 41, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
यथाभूतार्थवाक्यार्थाः सर्वा एव ममोक्तयः ।
नासमर्था विरूपार्थाः पूर्वापरविरोधदाः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
आपका यह व्यामोह वाक्य के दोष से नहीं है, किन्तु आपके तात्पर्य में ध्यान न देने रूप मेरे कथन
दोष से ही है, यह दर्शाते हुए श्रीवसिष्ठजी समाधान करते हैं।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, मेरे सभी वचन यथाभूत वाक्यार्थ से युक्त हे । वे पदों की
आकांक्षा योग्यता आसत्तिरूप सामर्थ्य से हीन नहीं हैं। अवान्तर वाक्यार्थ महावाक्यार्थ के अपर्यवसायी
नहीं हैं यानी अवान्तर वाक्यार्थ महावाक्यार्थ में ही पर्यवसित हैं और न तो उपक्रम ओर उपसंहार में
परस्पर विरोध ही है