Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 40, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
चित्स्वरूपं परिकचच्छून्यमेवावतिष्ठते ।
यत्तद्दृश्यं स्थितं तत्स्याद्दृश्यमाकाशमेव तत् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे क्या हुआ ? यह कहते हैं।
यद्यपि चिद्रूप आत्मा स्वप्रकाश है, तथापि वह सर्वप्रथम अपने से निर्मित अपने से पृथक् शून्याकार
से प्रतीत होता है। वही अवस्था सर्वजन प्रसिद्ध आकाश है