Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
क्व किलातीतमनःषष्ठेन्द्रियवृत्ति ब्रह्मतत्त्वं क्व भङ्गुरेयं तज्जा पदार्थश्रीरिति वचनरचना ।
यदि चायमारम्भो ब्रह्मण आपतितस्तदनेन तत्सदृशेनैव भवितव्यम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
मन ओर इन्द्रियों की वृत्ति से परे
ब्रह्मतत्त्व कहाँ ! उससे उत्पन्न हुई क्षणभंगुर पदार्थ शोभा से युक्त यह सृष्टि कहाँ ? यदि पदार्थ सृष्टि
ब्रह्म से आई है, तो इसे ब्रह्म के सदुश ही होना चाहिए, विरुद्ध नहीं होना चाहिए