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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verses 32–33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, verses 32–33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

गन्धर्वनगरराजगृहे विपुलाङ्गनाजनमिव भूतले व्योम निवेशयति ॥ ३२ ॥ रक्तकुट्टिमेष्वाकाशप्रतिबिम्बमिव किंचिदस्ति जगति भविष्यति वा बभूव ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

तो क्या आकाश को नीचे रखने के लिए भूतल को कहीं दूसरी ओर ले जाता है, ऐसी कोई शंका करे, तो उस पर नहीं ऐसा कहते हैं। गन्धर्वनगर के राजमहल में बहुत-सी महिलाओं की तरह भूतल में ही आकाश की स्थापना करता है