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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 39, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । कलङ्ककलना ब्रह्मण्यस्ति नास्तीति वानघ । सिद्धान्तकाले वक्तव्यं स्वयं ज्ञास्यसि राघव ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे निष्पाप श्रीरामचन्द्रजी, ब्रह्म मेँ कलंक हे, अथवा नहीं, यह बात आप स्वयं जान जायेंगे । यदि स्वयं न जान सकेंगे, तो परिनिष्ठित उपदेश के समय यह मैं आपको बतलाऊँगा इस समय नहीं