Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
यथा सर्वगतः सौक्ष्म्यादाकाशो नोपलक्ष्यते ।
तथा निरंशश्चिद्भावः सर्वगोऽपि न लक्ष्यते ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जब आत्मस्थिति से ही सबकी स्थिति है, तो आत्मा का सर्वत्र दर्शन क्यो नहीं होता ? ऐसी शंका
होने पर कहते है ।
जैसे सर्वव्यापक आकाश आदि भी सूक्ष्म होने के कारण दुष्टिगोचर नहीं होता वैसे ही निरवयव
शुद्ध चेतन सर्वव्यापक होने पर भी नहीं दिखाई देता