Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
यथेदृशं स्थितं विश्वं विश्वातीते चिदात्मनि ।
तन्मे कथय हे ब्रह्मन् पुनर्बोधविवृद्धये ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
अब जगत स्थितिरूप प्रकरण के मुख्य अर्थ को जानने के लिए श्रीरामचन्द्रजी पूछते है ।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे ब्रह्मन्, विश्वातीत इस चिदात्मा में यह इस प्रकार विश्व, जिसका कि
पहले वर्णन कर चुके हैं, जैसे स्थित है, उसे ज्ञानवृद्धि के लिए पुन: मुझसे कहिये
सर्ग सन्दर्भ
पैंतीसवाँ सर्ग समाप्त छत्तीसवाँ सर्ग अपने-आप स्थित असक्त ही चित् की सर्वत्र स्थिति है तथा चित् की ही सर्वत्र स्थिति से संपूर्ण पदार्थो की स्थिति है, उनकी पृथक् स्थिति नहीं है, यह वर्णन |