Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
दृश्यदृष्टिः स्फुटा येयं सा ह्यवश्यमसन्मयी ।
तन्मयत्वं च मनसः स्वरूपं विद्धि नेतरत् ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
जो यह स्फुट दृश्य दृष्टि है वह अवश्य असन्मयी है, मन के स्वरूप को भी
आप उक्त असत् दृश्यमय ही जानिये । दृश्य से अतिरिक्त मन का कोई स्वरूप नहीं हे