Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
प्रणयेन यमं जित्वा कृत्वा वचनसंगमम् ।
परलोकादुपानीतः सावित्र्या सत्यवान्पतिः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
राजकुमारी सावित्री ने पति के प्राणों
का अनुगमन तथा स्तुति आदिरूप से प्रसन्नता के उपाय से यम को अपने वश में कर "सत्यवान के
प्राणों को छोडकर और कोई वर माँगो” इस प्रकार के यम के वाक्य का सत्यवान से मेरे सौ लड़के हो,
इस वर प्रार्थना रूप अपने वचन से सामंजस्य स्थापित कर अपने पति सत्यवान को परलोक से लौटा
लिया