Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
कष्टीकृतमतिर्लोकः संकटेष्वेव मज्जति ।
अनया दुरहंकृत्या भावात्संसक्तया चिरम् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वभाव से ही चिरकाल से पीछे
पड़ी हुई इस दुष्ट अहंकृति से दुर्वासना ओं द्वारा दुष्कर्मो में प्रवृत्त करने से पीडित हुआ पुरुष संकटों में
ही मग्न रहता हे