Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
दृश्यात्यन्ताभावतस्तु परमेवावशिष्यते ।
अन्याभाववशादाशु जीवस्तत्रैव लीयते ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
उससे इसकी पुरुषार्थसिदि भी होती है, ऐसा कहते हैं।
दृश्य के अत्यन्त अभाव से तो एकमात्र परब्रह्म ही अवशिष्ट रहता है, अन्य वस्तुओं का अभाव होने
से उसीमें जीव शीघ्र लीन हो जाता है