Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
नाशायापद्गतार्थिन्या दृष्ट्या दृश्यादिदृष्टयः ।
दुःखादृते निराबाधं सुखं किं चिदवाप्यते ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले भोग, राग आदि की द्रष्टियों के विनाश के लिए तत् तत् विषयों में तो, दृष्टयो का अन्वेषण
करना चाहिये। ऐसा कहते हैं।
क्षुधा, प्यास आदि आपत्ति से युक्त पुरुषों का विषय प्रदान द्वारा अनुग्रह करनेवाली भोगदृष्टि के
नाश के लिए पहले उसकी विरोधिनी विषयदोष दृष्टियों का अवश्य अन्वेषण करना चाहिये।
शंका : भोगद्ष्टि की विरोधिनी विषयदोषद्ृष्टियों का अन्वेषण करने पर विषय त्याग होने से तुरन्त
दुःख होगा ?
समाधान : वैराग्य, अभ्यास आदि दुःख के बिना भूमानन्दरूप चैतन्य क्या कहीं पाया जा सकता
है ? अर्थात् भूमानन्दस्वरूप चित् की प्राप्ति के लिए विषयत्यागरूप दुःख उठाना ही पड़ेगा