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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 56

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 56

संस्कृत श्लोक

दौर्भाग्यदायिनी दीना शुभहीना विचारणा । घनदीर्घमहानिद्रा त्यज्यतां संप्रबुध्यताम् ॥ ५६ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार शास्त्रार्थ के विचार का विधान कर अब जीवन, धन, पशु, पुत्र आदि सांसारिक विचार की और अन्य दर्शनों के विचार की त्याग के लिए निन्दा करते हैं। परिणाम में दुर्भाग्य देनेवाली, विचार के समय कृपणता की हेतु होने के कारण निवेश कराने के कारण गाढ़ और दीर्घ महानिद्रारूप धन, जीवन आदि की विचारणा तथा अन्य दर्शनों की विचारणा छोड देनी चाहिये ओर बोधरूप आलोकप्राप्त करना चाहिये