Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
स्ववृत्तान्तमिमं कुत्र कदा कथयते कथम् ।
श्रोष्यन्ति भगवंस्ते वा वर्णयेदं यथाक्रमम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे ब्रह्मन्, वे अपने इस वृत्तान्त को कहाँ, कब कैसे और किससे सुनेंगे ? इसे
आप क्रम से कहने की कृपा कीजिये