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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

शास्त्रेणासादितं दृश्यमिति निर्वाणसंस्थिताः । नानादुःखविकाराणि शुष्कतर्कमतानि ये ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे जल गड्ढे की ओर जाते हैं वैसे ही जो नाना दुःख देनेवाले शुष्क तार्किक मतों की ओर जाते हैं, वे पारमार्थिक आत्मभाव में स्थिति रूप परमपुरुषार्थ प्राप्ति का विनाश करते हैं । इसलिए तर्कं से ही उसका निर्णय हो जायेगा, महावाक्यों के अवलम्बन की क्या आवश्यकता हे, ऐसी शंका नहीं करनी चाहिये, यह भाव हे