Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
राजमन्दिरदार्वन्तर्व्रणवास्तव्यतां गतः ।
मशकोऽपि प्रसङ्गेन श्रुत्वा शान्तिमुपैष्यति ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
राजमहल
के स्तम्भरूप लकड़ी की दरार में रहनेवाला मच्छर भी प्रसंगवश लोगों द्वारा कही जा रही अपने
पूर्वजन्म के वृत्तान्तो से युक्त ब्रह्मकथा को सुनकर शान्ति को प्राप्त होगा