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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

क्व किलामरविध्वंसिशम्बरानीकनाथता । क्व तापतप्तजम्बालजालजर्जरमीनता ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

कहाँ तो देवताओं का विनाश करनेवाली शम्बरासुर की सेनाओं का सेनापतित्व और कहाँ वनाग्नि के ताप से तपी हुई कीचड़राशि में जीर्ण-शीर्ण मलिनता ? भाव यह कि पहले की निरभिमानिता से पीछे के अभिमान में फलतः बड़ा अन्तर है