Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

इदं जगदसद्ब्रह्म सत्यमित्येव वक्ति यः । तमुन्मत्तमिवोन्मत्तो विमूढोऽपि हसत्यलम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

अतएव अनधिकारी पुरुष में उपदेशवचन उन्मत्त के प्रलाप के तुल्य होने से अज्ञ ओर अभिज्ञ दोनों के उपहास के योग्य होता है, ऐसा कहते हैं। यह जगत असत्य है, ब्रह्म सत्य है, ऐसा जो अनधिकारी के प्रति कहता है, उन्मत्त ओर विमूढ पुरुष भी उसका उन्मत्त के तुल्य उपहास करता है