Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
एषातिमूढविषय उक्तिरेव न राजते ।
अभ्यासेन विनोदेति नानुभूतेरपह्नवः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसे जगत की सत्यता का पूर्ण निश्चय है, वह
अत्यन्त मूढ है, उसके प्रति यह जगत की असत्यता का कथन सुशोभित होता ही नहीं परमार्थ तत्त्व के
विचार के अभ्यास के बिना “जगत सत्य है” इस अनुभव का अपलाप उदित नहीं होता